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Plantation by VC


Posted on 05/08/2026

गुरुपूर्णिमा के पावन एवं आध्यात्मिक अवसर पर दिनांक 29 जुलाई, 2026 को श्री माता मनसा देवी राजकीय संस्कृत महाविद्यालय, पंचकुला में महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. राजेंद्र कुमार अनायत जी मुख्यातिथि के रुप में पधारे । महाविद्यालय प्राचार्या डॉ. सीमा सिंह तथा महाविद्यालय परिवार द्वारा मुख्यातिथि जी का श्री फल एवं पारंपरिक सम्मान तिलक के साथ हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन किया गया । इस अवसर पर गुरुपूर्णिमा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कुलपति जी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु को ज्ञान, संस्कार और जीवन-मूल्यों का सर्वोच्च मार्गदर्शक माना गया है । गुरुपूर्णिमा हमें अपने गुरुजनों के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने की प्रेरणा देती है तथा ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने का संदेश देती है । इसके उपरांत मुख्यातिथि जी ने महाविद्यालय की प्राचार्या, शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक सदस्यों के साथ विस्तृत संवाद किया । उन्होंने महाविद्यालय से संबंधित विभिन्न शैक्षणिक एवं प्रशासनिक समस्याओं को अत्यंत गंभीरता से सुना तथा उनका सरल, व्यावहारिक एवं त्वरित समाधान प्रस्तुत करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए । उन्होंने आश्वासन किया कि महाविद्यालय के समग्र विकास एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए विश्वविद्यालय स्तर पर हर संभव सहयोग दिया जाएगा । कार्यक्रम के अंतर्गत ईको क्लब द्वारा पर्यावरण संरक्षण एवं "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान को आगे बढ़ाते हुए महाविद्यालय प्रांगण में पौधा रोपण करवाया गया । इस अवसर पर डॉ. राजेंद्र जी ने पौधा रोपित किया तथा प्राचार्या डॉ. सीमा सिंह जी द्वारा सभी शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक सदस्यों को पौधे वितरित किए गए । सभी ने पौधारोपण एवं उनके संरक्षण का संकल्प लिया । प्राचार्या जी ने कहा कि जिस प्रकार गुरु जीवन को ज्ञान से समृद्ध करते हैं, उसी प्रकार वृक्ष पृथ्वी को जीवन, हरियाली और स्वच्छ वातावरण प्रदान करते हैं । गुरुपूर्णिमा के पावन अवसर पर पौधे रोपण करना प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी और भावी पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य का प्रेरणादायी संदेश है । कार्यक्रम के समापन पर मुख्यातिथि जी को प्लांटर (गमला) देकर आभार व्यक्त किया गया । प्राचार्या जी ने कुलपति जी व उपस्थित सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय के संयुक्त प्रयासों से शिक्षा, संस्कार, पर्यावरण संरक्षण तथा भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के संवर्धन की दिशा में निरंतर उत्कृष्ट कार्य होते रहेंगे