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Extension Lecture
Posted on 20/07/2026
विशिष्ट व्याख्यान
महाविद्यालय में दिनांक 02 फरवरी 2026 को संस्कृत विभाग एवं प्लेसमेंट सेल के संयुक्त तत्वाधान में “व्यक्तित्व निर्माण में श्रीमद्भगवद्गीता की भूमिका” व “श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार प्रज्ञासंयम” विषय पर एक विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया । कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री रामदीया शास्त्री, आचार्यचर, केन्द्रीय विद्यालय, जीरकपुर जी रहे । मंच संचालन डॉ. राजबीर शास्त्री जी द्वारा किया गया । कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्या महोदया जी ने की । इस अवसर पर प्राचार्या महोदया द्वारा मुख्य वक्ता श्री राम दिया जी को श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया ।
मुख्य वक्ता जी ने अपने वक्तव्य में श्रीमद्भगवद्गीता को व्यक्ति-निर्माण, चरित्र-निर्माण एवं मानव मूल्यों का आधार बताते हुए कहा कि गीता जीवन को सही दिशा देने वाली अमूल्य धरोहर है । उन्होंने गीता से प्रेरित महान व्यक्तित्वों एवं वीर शिरोमणि महापुरुषों के अतुल्य योगदान का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को कर्मयोग, अनुशासन एवं निःस्वार्थ सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी । प्राचार्या जी ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों से कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन-प्रबंधन का श्रेष्ठ मार्गदर्शक है । उन्होंने बताया कि गीता के उपदेश कर्तव्यनिष्ठा, आत्मसंयम, समत्वभाव, सत्य एवं नैतिक मूल्यों को विकसित करते हैं, जो विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण और उज्ज्वल भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक हैं । प्राचार्या जी ने विद्यार्थियों से गीता के सिद्धांतों को अपने दैनिक जीवन में अपनाने का आह्वान किया । कार्यक्रम में महाविद्यालय प्राध्यापकगण, कर्मचारीगण एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे । अंत में डॉ. सुनील द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया ।
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